covid-19-patient-treatment in-hindi कोरोना के मरीजों के इलाज में जगी नई उम्मीदसस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल, पॉजिटिव असर दिखा रही है खून को पतला करने वाली यह दवा।

Coronavirus Treatment : कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए चिकित्सकसस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल, वैज्ञानिक से लेकर आम लोग हर संभव प्रयास कर रहे हैंसस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल, लेकिन कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों भारत में 24 घंटे में 76 हजार से भी अधिक कोरोना के नए मामले सामने आए हैंसस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल, जो अब तक का सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला आंकड़ा है। यह स्थिति बेहद ही डराने वाली है। सौ से अधिक देशों के वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन पर रिसर्च कर रहे हैंसस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल, कई वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के आखिरी स्टेज में हैं, तो कई साल के अंत तक वैक्सीन लोगों तक पहुंचाने का दावा भी कर चुके हैं। इन सबसे अलग, पुणे से एक अच्छी खबर यह भी आ रही है कि लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन (LMWH) नाम की एक दवा कोरोना के मरीजों पर पॉजिटिव असर दिखा रही है। पुणे के कुछ चिकित्सकों ने इस बात का दावा किया है। Also Read - स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, कोविड रोगियों के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं

लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन (LMWH) खून को पतला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोरोना महामारी (Corona pandemic) में यह दवा कोविड-19 मरीजों के इलाज (Coronavirus Treatment) में प्रभावी साबित हो रही है। पुणे के चिकित्सकों ने यह दावा मरीजों पर दिखे इस दवा के सकारात्मक असर के बाद किया है। लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन (Low molecular weight heparin) ड्रग से इलाज करने के बाद कोरोना मरीज कम समय में ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए। कई मरीज जल्दी ठीक भी हुए हैं। Also Read - Covid-19 Live Updates: भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या हुई 49,30,236,सस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल अब तक 80,776 लोगों की मौत

कुछ मरीजों में दवा के अच्छे रिजल्ट नजर आने के बाद चिकित्सकों ने कहा है कि सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) से संक्रमित मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग, काउंटर ब्लड इंफ्लेमेशन की समस्या होती है। और इन दोनों समस्याओं को कम करने में लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन ड्रग प्रभावी साबित हुई है। Also Read - केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, कोरोनावायरस से लड़ाई अभी जारी रहेगी

कई मृत कोरोना मरीजों के पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि कोरोनावायरस के कारण शरीब में छोटे-छोटे ब्लड क्लॉट्स बनते हैं। इस कारण भारत में अब चिकित्सक खून को पतला करने वाली दवाओं का इस्तेमाल इलाज (Coronavirus Treatment in hindi) के दौरान कर रहे हैं। कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों में लो मॉलिक्यूलर वेट हेपारिन का इस्तेमाल कई महीनों से हो रहा है, लेकिन जब से कोरोना केसेज तेजी से बढ़ रहे हैं, इस ड्रग का इस्तेमाल भी अधिक किया जाने लगा है। इसका असर भी अब तक सकारात्मक ही हुआ है।

ब्लड क्लॉट होना सेहत के लिए सही नहीं। इससे कई तरह के खतरे बढ़ जाते हैं। जब फेफड़े में ब्लड क्लॉट बनता है, तो सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन हैमरेज, किडनी की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में LMWH दवा ब्लड क्लॉटिंग होने पर मरीजों को दिया जा रहा है और यह असर भी दिखा रहा है।

Published : August 31, 2020 1:14 pm Read Disclaimer Comments - Join the Discussion भारत की पहली महिला कार्डियोलॉजिस्ट का कोरोना के कारण निधन, दिखे थे सांस न ले पाने और बुखार जैसे लक्षणभारत की पहली महिला कार्डियोलॉजिस्ट का कोरोना के कारण निधन, दिखे थे सांस न ले पाने और बुखार जैसे लक्षण भारत की पहली महिला कार्डियोलॉजिस्ट का कोरोना के कारण निधन, दिखे थे सांस न ले पाने और बुखार जैसे लक्षण ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोविशील्ड वैक्सीन का मैसूर के हॉस्पिटल में शुरू हुआ क्लिनिकल ट्रायलऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोविशील्ड वैक्सीन का मैसूर के हॉस्पिटल में शुरू हुआ क्लिनिकल ट्रायल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोविशील्ड वैक्सीन का मैसूर के हॉस्पिटल में शुरू हुआ क्लिनिकल ट्रायल ,,

上一篇:सस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल सुप्रीम कोर्ट का आदेश, फ्री में हो कोरोना टेस्ट। TheHealthSi    下一篇:सस्ते इलेक्ट्रॉनिक खेल Covishield Vaccine Trial : मैसूर के हॉस्पिटल में शुरू हुआ कोविड-19 वक्सी    

Powered by सोनी पोर्टेबल गेमिंग @2018 RSS地图 html地图